श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

जन्माष्टमी 2025 के शुभ मुहूर्त, पूजन-विधि, और उससे जुड़ी संपूर्ण जानकारी विस्तार से समझाता हूँ —


🗓 तिथि और समय

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 15 अगस्त 2025, रात 11:49 बजे

  • अष्टमी तिथि समाप्त: 16 अगस्त 2025, रात 9:34 बजे

  • चंद्रोदय (Moonrise): 16 अगस्त, रात 11:32 बजे

  • निशीथ (मध्यरात्रि) पूजन मुहूर्त:
    🕛 रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक (16 अगस्त)

👉 इस अवधि में ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।


🙏 पूजन-विधि (Krishna Janmashtami Puja Vidhi)

  1. व्रत व संकल्प

    • दिन भर उपवास (निर्जला या फलाहार)।

    • संकल्प लें — “मैं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत कर रहा/रही हूँ, कृपया प्रभु मेरी पूजा स्वीकार करें।”

  2. श्रीकृष्ण की प्रतिमा या झांकी सजाना

    • छोटे झूले या पालने में बालकृष्ण को विराजित करें।

    • पीले वस्त्र पहनाएं, मोरपंख, बंसी और मुकुट सजाएं।

  3. सामग्री (Puja Samagri)

    • धूप, दीप, नैवेद्य (माखन-मिश्री, पंजीरी, फल), गंगाजल, फूल, तुलसी पत्ते।

  4. पूजन क्रम

    • चंद्रोदय के बाद स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करें।

    • गंगाजल से आचमन करें।

    • दीप जलाएं और श्रीकृष्ण का ध्यान करें।

    • मंत्र का जाप करें:
      “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”

    • श्रीकृष्ण को तुलसीदल और माखन-मिश्री अर्पित करें।

  5. जन्मोत्सव (मध्यरात्रि 12:04–12:47)

    • ठीक निशीथ काल में भगवान का जन्म मानकर उनका अभिषेक करें (दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल से)।

    • आरती करें और “नंद के आनंद भयो” जैसे भजन गाएं।

    • झूले को धीरे-धीरे झुलाएं।

  6. आरती और प्रसाद वितरण

    • श्रीकृष्ण की आरती करें।

    • परिवार व भक्तजन प्रसाद ग्रहण करें।

    • व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय या अष्टमी समाप्ति के बाद करें।


✨ विशेष महत्व

  • निशीथ पूजन इसलिए खास है क्योंकि यही वास्तविक जन्मकाल है।

  • चंद्रोदय के समय दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • व्रत और उपवास से मन की शुद्धि होती है तथा भक्त पर श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहती है।

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